शराब के ठेकों को लेकर आई बड़ी खबर, पहली बार ऐसा देखने को मिला है

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    राजस्था में ऐसा पहली बार हो रहा है कि शराब की दुकानों के लिए ठेकेदारों की दीवानगी कम हो रही है, ऐसा पहली बार हो रहा है कि सरकार ठेकेदारों को बुला बुलाकर शराब के ठेके जारी कर रही है लेकिन बहुत से ठेकेदार हैं कि शराब के ठेके लेने को ही तैयार नहीं है। दरअसल इस बार की आबकारी नीति में सरकार ने ठेकेदारों पर इतनी नकेल कस दी है कि एक साल में करोड़पति बनाने वाला यह धंधा अब रोडपति बनाने की दिशा में चल पडा है। यही कारण है कि सरकार एक महीने में भी शराब की 25 फीसदी तक दुकानें नहीं बेच सकी है। करीब 1900 दुकानों के लिए कल यानि 28 अप्रेल को फिर से नीलामी रखी गई है। कुल दुकानें 7664 हैं।

    पंद्रह हजार करोड़ रुपए कमाने का टारगेट रखा है सरकार ने- साल 2022-23 में शराब से कमाई करने का टारगेट सरकार ने 15000 करोड़ रुपए रखा है। यह टारगेट पिछले साल की तुलना में दो हजार करोड़ रुपए से भी ज्यादा है। सरकार पिछले तीन टर्म से हर साल टारगेट से कम ही कमा पा रही है लेकिन उसके बाद भी तीन साल से हर साल रेवेन्यू टारगेट बढ़ा रही है। अब लगातर बढ़ रहे टारगेट के चलते ठेकेदारों के लिए सख्त पॉलीसी बनाना शुरु कर दिया गया है। ऐसे में ठेकेदारों का मोह शराब से भंग होता दिख रहा है।

    इसलिए हाथ खींच रहे हैं ठेकेदार शराब से- जयपुर में पंद्रह साल से ठेके ले रहे झोटवाड़ा निवासी महेश कुमार ने बताया कि सरकार इस बार सीधे दो साल की तय पाई कर रही है। जो ठेकेदार दस लाख की शराब साल में लेते थे उन पर 25 लाख रुपए तक की शराब लेने का दबाव बनाया जा रहा है। शराब बिके या नहीं इससे सरकार को फर्क नहीं। ठेकेदार को शराब उठानी ही होगी और नहीं उठाएगा तो जुर्माना भी देना होगा। उपर से सभी तरह के खर्च भी इस साल बढ़ा दिए गए हैं। इसलिए ठेकेदार हाथ खींच रहे हैं और दूसरे धंधों में उतर रहे हैं। उपर से शराब की कीमतों में मामूली भर बढ़ोतरी की गई है। सारा पैसा ठेकेदार के उपर ही लाद दिया गया है।

    तीन बार रियायत देने के बाद भी 25 फीसदी दुकानें नहीं बिकी- आबकारी अफसरों ने बताया कि इस बार चौथी और आखिरी बार ई नीलामी रखी गई है जो कि कल है। इस बार अभी तक 25 फीसदी दुकानें यानि करीब 1900 दुकानें नहीं बिक सकी हैं। तीन बार रियायत भी जारी की गई है लेकिन उसके बाद भी ठेकेदार दुकानें लेने में रूचि नहीं दिखा रहे हैं। इस बार दुकानों की गारंटी राशि में दस फीसदी तक छूट दी गई है। यही छूट पहले भी करीब बीस फीसदी तक दी जा चुकी है।

    जयपुर, उदयपुर, गंगानगर, अलवर , अजमेर सबसे ज्यादा खाली दुकानें- आबकारी अफसरों के अनुसार अजमेर में 111, भरतपुर में 47, चित्तौड में 93, डूंगरपुर में 3, अलवर में 102, भीलवाडा में 27, चुरु में 44, अनुमानगढ में 86, बांसवाउ़ा में 6, बीकानेर में 50, दौसा 27, जयपुर शहर 154, जयपुर ग्रामीण 47, बांरा में 83, बाडमेर में 64, बूंदी में 34, धौलपुर में 36, जैसलमेर में 24, जालोर 14, झालावाड़ 70, झुझुनूं 73, जोधपुर 74, करौली 29, कोटा 49, नागौर 43, पाली 45, प्रतापगढ़ 39, राजसमंद 18, सवाई माधोपुर 14, सीकर 61, सिरोही 36, गंगानगर 99, टोंक 61 और उदयपुर में 171 शराब की दुकानें बिक नहीं सकी हैं। इनके लिए अंतिम ई नीलामी कल रखी गई है।

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