पिता को खोने के बावजूद नहीं हारी हिम्मत, 22 साल की उम्र में IAS बनकर पिता का सपना किया सच

ज्यादातर लोग लक्ष्य के मार्ग में आने वाली कठिनाइयों के आगे अपने घुटने टेक देते हैं। वहीं कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो इन कठिनाइयों को पार करते हुए अपना लक्ष्य हासिल करते हैं।आज हम आपको एक युवा आईएएस हिमांशु नागपाल की कहानी बताने वाले हैं, जिन्होंने महज 22 साल की आयु में यूपीएससी की परीक्षा पास की।

Success Story Of IAS Topper Himanshu Nagpal | IAS Success Story: पहले पिता  फिर भाई को खोने के बावजूद नहीं खोई हिम्मत और 22 साल की उम्र में हिमांशु  बनें IAS ऑफिसर

आपको बता दें कि हिमांशु नागपाल का जन्म हरियाणा के हिसार जिले में एक छोटे से गांव भुना में हुआ था।हिमांशु में अपनी शुरुआती शिक्षा गांव के ही हिंदी मीडियम स्कूल से ग्रहण की थी। यह बचपन से ही पढ़ाई लिखाई में बहुत होशियार थे।

आपको बता दें कि हिमांशु में 12वीं की परीक्षा में टॉप किया था। उनका अपने पिताजी के साथ खास लगाव था और हमेशा पिताजी हिमांशु को प्रोत्साहित करते रहते थे और उनका हौसला बढ़ाया करते थे।

पिता का अधूरा सपना था IAS बनना, होनहार बेटे ने कर दिया सच - success story  of ias himanshu nagpal

माता-पिता का सपना होता है उनका बच्चा पढ़-लिखकर कोई बड़ा अफसर बने ठीक उसी प्रकार से हिमांशु की पढ़ाई को देखकर उनके पिताजी चाहते थे कि उनका बेटा आईएएस अफसर बनकर देश की सेवा करे

हिमांशु नागपाल और उनके पिताजी की आपस में बेहद अच्छी बॉन्डिंग थी। हिमांशु के पिता जी उनके एक अच्छे दोस्त और सलाहकार भी थे।परंतु इसी बीच हिमांशु के जीवन में एक दुखद घटना हो गई। उनके पिताजी का निधन हो गया जिसके चलते हिमांशु को काफी गहरा सदमा लगा।

हिमांशु नागपाल ने बातचीत के दौरान यह बताया था कि जब उनका 12वीं का बोर्ड का परिणाम घोषित हुआ तो रिजल्ट देखने के बाद पापा की आंखों में एक अलग ही चमक देखने को मिली थी।

Success Story: दो हादसों ने बदली दुनिया, हिंदी मीडियम से की पढ़ाई, हिमांशु  नागपाल ऐसे बने IAS - success story of ias himanshu nagpal rank in upsc exam  hindi medium ias officer

अचानक से ही पिताजी की मृत्यु के बाद हिमांशु पूरी तरह से टूट गए थे परंतु इस कठिन परिस्थिति में भी हिमांशु ने हिम्मत नहीं हारी और किसी न किसी तरह खुद को संभाल लिया।

पिताजी की मृत्यु के सदमे से बाहर निकलने में उन्हें काफी दिन लग गए थे। किसी तरह वह सदमे से बाहर आए तो उन्होंने यह तय कर लिया था कि वह अपने पिताजी के अधूरे सपने को पूरा करेंगे।

इसमें उनकी माताजी और चाचा ने उनका हौसला बढ़ाया था। हिमांशु दिल्ली आकर अपने पापा के सपने को पूरा करने की तैयारी में जुट गए।हिमांशु नागपाल ने अपने जीवन में कई परेशानियों का सामना करा और कठिन संघर्ष करते हुए आईएएस की तैयारी में जी जान से लगे रहे।आखिर में उनकी मेहनत का फल उनको प्राप्त हुआ। उन्होंने पहले ही प्रयास में आईएएस की परीक्षा में सफलता हासिल कर ली।

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