इस शहर में शादी के लिए महिलाएं करती है सड़कों पर कुंवारे लड़कों का शिकार

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    राजस्थान के जोधपुर में दुनिया के सबसे अनोखे मेले का आयोजन किया जाता है। यहां धींगा गवर पूजन के 16वें और अंतिम दिन पूजा करने के बाद सुहागिन महिलाएं अलग-अलग स्वांग रचकर रात में सड़कों पर निकलती हैं। इसे बेंतमार के नाम से भी जाना जाता है। प्रचीन काल से चले आ रहे, इस मेले की खासियत यह है कि भाभी अपने देवर और अन्य कुंवारे युवकों को प्यार से छड़ी मार कर बताती हैं कि यह कुंवारा है। जिसके बाद कुंवारे लड़कों की शादी जल्द हो जाती है।

    दरअसल धींगा गवर पूजन के अंतिम दिन यहां की सड़कों पर महिलाओं का राज होता। महिलाएं हाथ में बेंत (छड़ी) लेकर सड़कों पर निकलती हैं और जो पुरुष सामने दिख जाता है उसे मारने लगती है। मान्यता के मुताबिक इस दौरान कुछ युवक बेंत की मार खाना पसंद भी करते हैं। कहते हैं कि ये बेंत कुंवारे युवकों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। मान्यता के मुताबिक बेंत पड़ते ही विवाह योग्य युवकों शादी हो जाती है।

    पौराणिक मान्यता के मुताबिक माना जाता है कि जिस युवक की शादी नहीं हुई है और उसे यह बेंत पड़ जाती है तो उसका रिश्ता जल्द तय हो जाता है। माना जाता है कि पुराने समय में भाभी अपने देवर और अन्य कुंवारे युवकों को प्यार से छड़ी मारकर बताती थीं कि यह कुंवारा है और रिश्ते की बात चल रही है। ऐसे में साथ वाली महिलाएं भी प्यार से बेंत मारकर कहती थीं- बात पक्की हो जाएगी और अब जल्द शादी भी हो जाएगी।

    जोधपुर मेवाड़ के इतिहास पर सन् 1884 तक के महाराणाओं के विस्तृत वृत्तांत व आनुषांगिक सामग्री पर आधारित ‘ वीर विनोद ‘ ग्रंथ में महाराणा सज्जनसिंह के आश्रित राजकवि कविराज श्यामलदास ने मेवाड में धींगा गणगौर मनाए जाने का उल्लेख मिलता है।

    उदयपुर के महाराणा राजसिंह अव्वल ने नाराज अपनी छोटी महारानी को प्रसन्न करने के लिए पारम्परिक रीति के खिलाफ जाकर धींगा गवर को लोकपर्व के रूप में प्रचलित किया था , इसीलिए इसका नाम धींगा गणगौर प्रसिद्ध हुआ । ग्रंथ में कहा गया है कि धींगाई का अर्थ जबरदस्ती है।

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