फल, सब्जी, आटा हुआ महंगा, आम आदमी का हुआ बुरा हाल

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    कुछ खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ने से मई महीने में कृषि और ग्रामीण श्रमिकों के लिए खुदरा मुद्रास्फीति बढ़कर क्रमशः 6.67 प्रतिशत और 7.0 प्रतिशत हो गई। श्रम ब्यूरो ने सोमवार को एक बयान में यह जानकारी दी। इसके मुताबिक, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) पर आधारित कृषि श्रमिक के लिए मुद्रास्फीति मई, 2022 में 6.67 प्रतिशत रही। वहीं सीपीआई-आधारित ग्रामीण श्रमिकों के लिए मुद्रास्फीति दर मई में 7.0 प्रतिशत रही। अप्रैल, 2022 में यह दर क्रमशः 6.44 प्रतिशत एवं 6.67 प्रतिशत रही थी।

    श्रम ब्यूरो के मुताबिक, खाद्य मुद्रास्फीति कृषि एवं ग्रामीण श्रमिकों के लिए मई, 2022 में क्रमशः 5.44 प्रतिशत एवं 5.51 प्रतिशत रही। अप्रैल, 2022 में इन दोनों श्रेणियों के लिए खाद्य मुद्रास्फीति क्रमशः 5.29 प्रतिशत और 5.35 प्रतिशत रही थी। वहीं एक साल पहले मई, 2021 में यह दर क्रमशः 1.54 प्रतिशत और 1.73 प्रतिशत थी। मई, 2022 के महीने के लिए कृषि मजदूरों और ग्रामीण मजदूरों के लिए अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक संख्या क्रमशः 11 अंक और 12 अंक बढ़कर 1119 और 1131 अंक पर पहुंच गई। अप्रैल, 2022 में सीपीआई-एएल 1108 अंक और सीपीआई-आरएल 1,119 अंक थे।

    आंकड़े बताते हैं कि कृषि मजदूरों और ग्रामीण मजदूरों के सामान्य सूचकांक में वृद्धि के पीछे खाद्य समूह ने क्रमशः 7.44 और 7.65 अंक तक का अंशदान दिया। मुख्य रूप से चावल, गेहूं-आटा, ज्वार, बाजरा, दूध, मांस-मछली के अलावा सूखी मिर्च, मिश्रित मसाले, सब्जियों और फलों के दाम बढ़ने से मुद्रास्फीति सूचकांक बढ़ा। सूचकांक में वृद्धि अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग रही।

    खेतिहर मजदूरों के मामले में 20 राज्यों में दो से 20 अंक तक की वृद्धि दर्ज की गई। तमिलनाडु 1294 अंकों के साथ सूचकांक तालिका में शीर्ष पर रहा जबकि हिमाचल प्रदेश 883 अंकों के साथ सबसे नीचे रहा। ग्रामीण मजदूरों के मामले में 20 राज्यों में एक से 19 अंक तक की वृद्धि दर्ज की गई। तमिलनाडु 1281 अंकों के साथ सूचकांक तालिका में सबसे ऊपर है जबकि हिमाचल प्रदेश 934 अंकों के साथ सबसे नीचे है। राज्यों में कृषि और ग्रामीण मजदूरों दोनों के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक संख्या में अधिकतम वृद्धि केरल में दर्ज की गई।

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