मैं शहीद की माँ, सरकार मुझे पट्टा नहीं दे रही

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मैं शहीद की मां हूं…। मैंने देश के लिए मेरा बेटा दे दिया…। मेरा बेटा बहादुर था। लेकिन मुझे नहीं पता था कि मेरे बेटे की शहादत के बदले सरकार मुझे चक्कर कटवाएगी। मुझे सम्मान देने के बजाय धरना देने के लिए मजबूर करेगी। मेरे बेटे का जहां स्मारक बना हुआ है वहां का पट्टा लेने के लिए मैं अफसरों के आगे गिड़गिड़ाती हूं। हाथ जोड़ती हूं। लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही। अब जब तक मुझे पट्टा नहीं मिलेगा मेरा धरना जारी रहेगा। मोई-भारू गांव के शहीद राजेश कुमार की मां ने कलक्ट्रेट के सामने धरना शुरू कर दिया है। शहीद की मां गिन्नी देवी की मांग है कि उसके अविवाहित बेटे राजेश कुमार के परिवार के एक सदस्य को नौकरी दी जाए और शहीद स्मारक का पट्टा बनाया जाए। शहीद की मां ने बताया कि सार्वजनिक जगह पर शहीद स्मारक है। पिछले 21 साल से वह पट्टे के लिए चक्कर लगा रही है, परंतु पट्टा जारी नहीं किया गया है। जब ये मांग पूरी नहीं की जाएगी तब तक धरना जारी रहेगा। राजेश कुमार जम्मू-कश्मीर में छह जून 2़000 शहीद हो गए थे और वे अविवाहित थे। परिवार का गुजारा नहीं चल रहा है, ऐसे में उनके परिवार के एक सदस्य को नौकरी दी जाए। राजेश के भाई धर्मेन्द्र ङ्क्षसह ने बताया कि वह भी अपनी मां की सहायता के लिए धरना स्थल पर ही रहेगा। किसी भी सरकारी कार्यालय में जाते हैं तो उनकी सुनवाई नहीं हो रही।

मैं शहीद की मां, मुझे पट्टा नहीं दे रही सरकार
मैं शहीद की मां, मुझे पट्टा नहीं दे रही सरकार

इनका कहना है…
फौजी रामनाथ का पट्टा बनवा दिया है। पट्टे के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया भी जल्द पूरी कर ली जाएगी। वहीं शहीद के स्मारक के पट्टे का मामला मेरी जानकारी में नहीं था। कल इस मामले को पता करवाया जाएगा। किसी को परेशान नहीं होने दिया जाएगा।
लक्ष्मण कुड़ी, जिला कलक्टर झुंझुनूं

शहीद स्मारक गोचर भूमि पर था, इसलिए पट्टा निरस्त कर दिया गया है।
-विमला देवी, सरपंच मोई सद्दा
हमें पहले शहीद का स्मारक बनाने के लिए यही जमीन बताई थी। हमें जमीन की किस्म की जानकारी नहीं दी थी।
धर्मेन्द्र सिंह, शहीद का भाई

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