अगर आप चाहते है अपने बच्चों से मोबाइल की लत को छुड़वाना, तो गूगल फैमिली एप करेगा आपकी मदद

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आधुनिक युग में जहां आनलाइन क्लास, प्रोजेक्ट कार्य आदि सब कुछ मोबाइल से ही होता है, वहां बच्चों को मोबाइल न देने का मतलब उनकी प्रगति को रोकने जैसा है। इसके साथ ही किशोरावस्था में मोबाइल की लत को सख्ती से रोकने का भयानक रूप भी हो सकता है जो बीते दिनों में सामने आया है। पबजी गेम खेलने के लिए मना करने वाली मां को बेटे ने मौत के घाट उतार दिया है।

हालांकि इसका समाधान भी गूगल ने दो साल पहले ही दे दिया था। दरअसल, 2020 में पहले लाकडाउन के दौरान ही गूगल द्वारा बच्चों के आनलाइन क्लासेज के लिए ‘गूगल फैमिली लिंक’ नामक ऐप निकाला गया था जिसकी मदद से पैरेन्ट्स बच्चों के मोबाइल को कंट्रोल कर सकते हैं। पीजीआई इलाके में हुए हादसे के बाद वृन्दावन कालोनी निवासी समर्पण ग्रुप के आईटी मैनेजर संजीव शुक्ला ने गूगल के इस ऐप की याद दिलाते हुए जानकारी दी।

सभी पैरेन्ट्स को सजग करते हुए उन्होंने गूगल फैमिली लिंक के बारे में बताया कि इसमें दो लिंक होते हैं जिसके लिए दो अलग-अलग मोबाइल होना चाहिए। पहला पैरेन्ट लिंक जो पैरेन्ट्स के मोबाइल में इन्स्टाल करने के साथ ही दूसरा यानि चाइल्ड लिंक को बच्चे के मोबाइल में इन्स्टाल करना होगा। इसके लिए बच्चे के मोबाइल में उसका अलग से ईमेल आइडी डाला होना चाहिए।

पैरेन्ट लिंक को इन्स्टाल करते ही गूगल द्वारा मेम्बर अर्थात चाइल्ड ऐड करने का आप्शन आता है, जिसमें बच्चे के मोबाइल में इस्तेमाल होने वाला ईमेल आइडी ऐड करना होगा। ईमेल आइडी ऐड करते ही चाइल्ड के मोबाइल पर पीई नम्बर के रूप में एक वेरिफिकेशन नम्बर आएगा। जिसे पैरेन्ट्स के मोबाइल में एक्सेप्ट करने पर प्रोसेस चालू हो जाएगा।

इसके बाद इसमें बच्चों के मोबाइल को कंट्रोल करने के लिए टाइम फिक्स करना होगा कि बच्चा कितने घंटे मोबाइल चलाएगा। टाइम सेट करने के साथ ही आपके पास दो आप्शन होते हैं। जिसमें पहला है बेड टाइम, इसमें आपके द्वारा सेट किया हुआ टाइम खत्म होते ही बच्चे का मोबाइल बिल्कुल ब्लैक हो जाएगा।

दूसरा आप्शन है कि अगर आप बेड टाइम नहीं अप्लाई करते हैं तो दो से तीन घंटे या जो भी टाइम आपने सेट किया है उसके खत्म होते ही मोबाइल में जितने भी ऐप्लिकेशन्स होंगे वो अपने आप डिसेबल हो जाएंगे। इसके बाद बच्चा फोन और मैसेज कर सकता है, फोटो खींच सकता है लेकिन फोन पर और कोई काम नहीं कर सकता है।

उपरोक्त सिक्योरिटी लेवल के कंट्रोल के अलावा इस एप से बच्चों में किसी गेम की लत को भी कंट्रोल किया जा सकता है। जैसे पैरेन्ट लिंक खोलने पर आपको पता चल जाएगा कि आपके बच्चे के मोबाइल में कितने गेम इन्स्टाल हैं, कौन सा गेम वो कितनी देर से खेल रहा है। इसके साथ ही उस गेम को आप ब्लाक या अनइन्स्टाल भी कर सकते हैं। संजीव शुक्ला खुद इस ऐप का इस्तेमाल कर अपने बच्चों के मोबाइल को कंट्रोल करते हैं।

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