मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी को छोड़कर, अब बना रहे है केंचुआ खाद और कमा रहे है लाखो रूपये

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    राजस्थान के जयपुर के डॉ. श्रवण यादव की कहानी सुनकर आपको भी हैरानी होगी. उन्होंने जेआरएफ, एसआरएफ और पीएचडी की. फिर कई सरकारी नौकरी में इंटरव्यू दिन, लेकिन उन्होंने सफलता नहीं मिली. फिर उन्होंने लाइफ में कुछ नया करने की सोची. फिर श्रवण में अपनी पढ़ाई को सहारा बनाया और गोबर से केंचुआ खाद बनाई. अब इससे वह लाखों की कमाई कर रहे हैं. श्रवण यादव ने ऑर्गेनिक फार्मिंग में पीएचडी की है. इसके लिए उन्होंने एक मल्टीनेशनल कंपनी की नौकरी छोड़ दी. फिर उन्होंने ऑर्गेनिक खाद प्रिपरेशन को अपना करियर बना लिया.

    डॉ. श्रवण यादव ने ऑर्गेनिक फार्मिंग में उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए नौकरी छोड़ दी. फिर उन्होंने गोबर से वर्मी कंपोस्ट खाद बनाने का कारोबार खड़ा किया. उन्होंने 2020 में वर्मी कंपोस्ट यूनिट का काम शुरू किया था. पहले उन्होंने थोड़ा इंवेस्टमेंट किया और वर्मी कंपोस्ट की कुछ बेड तैयार की. फिर धीरे-धीरे उनका काम बढ़ता गया. बताया जा रहा है कि अब श्रवण 200 टन से ज्यादा खाद का प्रोडक्शन कर रहे है. हर महीने उन्हें लाखों की कमाई हो रही है.

    श्रवण यादव यू-ट्यूब चैनल के जरिए अपनी मार्केटिंग करते हैं. उनकी यूनिट में लाखों केंचुए हैं. यह केंचुए हर दो से तीन महीने में तीन गुणा तक हो जाते हैं. श्रवण का कहना है कि केंचुए 300 रुपये किलो के हिसाब से और वर्मी कंपोस्ट करीब 8 रुपये किलो के हिसाब से बिक जाता है. उनका कहना है कि उनकी वर्मी कंपोस्ट हरियाणा, पंजाब, गुजरात, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश तक जाता है.

    श्रवण यादव ऑर्गेनिक तरीके से खेती करते हैं. वे कुछ किसानों को बुलाकर अपने फार्म में ट्रेनिंग भी देते हैं. वो ऑर्गेनिक तरीके से वर्मी कंपोस्ट बनाना सिखाते हैं. इतना ही नहीं वे एग्रीकल्चर के स्टूडेंट‌स को ऑर्गेनिक खेती की तकनीकों पर ट्रेनिंग भी देते हैं.

    डॉ. श्रवण यादव कहते हैं कि जब हमने वर्मी कंपोस्ट यूनिट लगाने की सोची तो परिवार ने खूब समझाया. लोग ताने मारते थे कि पीएचडी करके गोबर का काम करेंगे. लेकिन मैंने लोगों की कभी परवाह नहीं की. बस अपने पैशन को फॉलो किया. जब अच्छी कमाई होनी लगी तो लोगों को मैंने गलत साबित कर दिया.

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