मलाइका अरोड़ा 48 की उम्र में वजन कम करने के लिए बॉयफ्रेंड के साथ सुबह सुबह करती है यह काम

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    आपके शरीर के अंदर लगातार चल रही उन सभी रासायनिक प्रक्रियाओं से है जो जीवन और सामान्य कामकाज को करने में मदद करती है। यह दो भाग में इस पूरी क्रिया को अंजाम देती है। पहली अपचय – खाद्य घटकों (जैसे कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और आहार वसा) का उनके सरल रूपों में तोड़ने का काम करता है। दूसरा उपचय – चयापचय का वह भाग जिसमें शरीर में निर्माण या मरम्मत कार्य होता है। उपचय के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है जो अंततः भोजन से आती है। जब हम दैनिक उपचय के लिए आवश्यकता से अधिक खाते हैं, तो अतिरिक्त पोषक तत्व आमतौर पर हमारे शरीर में वसा के रूप में जमा हो जाते हैं। और मोटापा समेत कई तरह की बीमारी होने लगती है। इसलिए इसका संतुलित रहना स्वस्थ्य शरीर के लिए जरूरी होता है। इसमें योगा आपकी मदद कर सकता है।

    बॉलीवूड एक्ट्रेस मलाइका अरोरा अपने 48 की उम्र में भी स्लिम और फिट दिखती हैं। इसकी वजह है संतुलित मेटाबॉलिज्म, जिसके लिए वह रोज योग करती है। मलाइका के योगासन करते हुए वीडियों को सर्व योगा स्टूडियों ने शेयर किया है। उन्होंने लिखा है कि हम अक्सर यह भूल जाते हैं कि शरीर के प्रत्येक कार्य का आधार चयापचय होता है। बेहतर चयापचय हर शारीरिक स्वास्थ्य लक्ष्य में मदद कर सकता है। चाहे वजन कम करना हो, या विकारों का प्रबंधन करना हो, चयापचय एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और योग स्वास्थ्य के लिए इन बुनियादी बातों पर ध्यान केंद्रित करता है। इस पोस्ट को मलाइका ने अपनी इंस्टा अकांउट पर शेयर किया है। अगर आप भी मलाइका जैसी सेहतचाहते हैं तो उनके बताए ये तीन योगासन आपको जरूर करना चाहिए।

    ​चयापचय का ठीक होना क्यों है जरूरी- अगर आपकी बॉडी का चयापचय संतुलित नहीं रहता है तो थकान, हाई कलेस्ट्रॉल, मांसपेशियों में कमजोरी, ड्राई स्किन, वजन बढ़ना, जोड़ों में सूजन, भारी मासिक धर्म, डिप्रेशन और दिल धड़कने की धीमी गति जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

    ​गरुडासन- इस आसान को करने से जांघों, कंधों और पीठ के ऊपरी हिस्सों में खिचाव आता है जिससे इन्हें मजबूती मिलती है। साथ ही संतुलन और मेटाबॉलिज्म में सुधार करता है। इसके अलावा साइटिका और गठिया को कम करने में मदद करता है।

    कैसे करें

    1. इस योगासन को करने के लिए ताड़ासन में खड़े हो जाइए।
    2. अपने दाहिने पैर को जमीन में मजबूती से दबाएं और अपने घुटनों को धीरे-धीरे मोड़ें।
    3. अपने बाएं पैर को दाहिने पैर के ऊपर से पार करने के लिए उठाएं।
    4. आपकी बायीं जांघ दाहिनी जांघ के ऊपर होनी चाहिए।
    5. बाएं पैर के अंगूठे जमीन की तरफ होने चाहिए।
    6. अब अपनी भुजाओं को फर्श के समानांतर रखते हुए आगे की ओर लाएं।
    7. दाहिने हाथ को बाएं हाथ के ऊपर से क्रॉस करें और अपने हाथों के पिछले हिस्से को एक दूसरे के सामने करें।
    8. हथेलियों को नमस्कार मुद्रा में मिलाने के लिए अपने हाथों को धीरे से मोड़ें।
    9. अपनी आंखों को आगे की ओर केंद्रित रखें और 5-6 सेकंड के लिए इस मुद्रा में रहें।
    10. हाथों को धीरे-धीरे खोलें और उन्हें अपने शरीर के किनारे आराम करने के लिए लाएं।
    11. अपने बाएं पैर को वापस जमीन पर लाएं और शुरुआती स्थिति में लौट आएं।

    ​त्रिकोणासन- त्रिकोणासन योग या त्रिभुज मुद्रा ताकत, संतुलन और शरीर में लचीलापन लाता है। यह योगासन शरीर में मेटाबॉलिज्म को बेहतर करने के साथ स्टैमिना और एनर्जी को बढ़ाने में मदद करता है। बेहतर एकाग्रता और चयापचय के साथ, यह शारीरिक और मानसिक संतुलन को बढ़ाता है। इसके अलावा यह तनाव, चिंता,पीठ दर्द या साइटिका की समस्या को भी कम करता है।

    कैसे करें-

    1. सीधे खड़े हो जाएं और पैरों को अलग रखें।
    2. अपने पैरों को आराम से चौड़ा करके सीधे खड़े हो जाइए।
    3. सांस भरते हुए दाहिने हाथ को ऊपर की ओर उठाएं।
    4. सांस छोड़ें और धड़ को कमर से बाईं ओर मोड़ें।
    5. झुकते समय अपने बाएं हाथ को बाएं पैर के पास लाएं।
    6. और धीरे-धीरे, टखने को पकड़ें।
    7. अपना दाहिना हाथ ऊपर की ओर, कंधे के ऊपर रखें।
    8. कंधों को संरेखित रखते हुए, सिर को ऊपर की ओर मोड़ें और छत की ओर देखें।
    9. कुछ सेकंड के लिए रुकें। और खड़े होने की स्थिति में लौटेने के बाद दूसरी तरफ दोहराएं।

    ​मालासन- मलासन संतुलन, एकाग्रता और ध्यान में सुधार करता है। यह श्रोणि में परिसंचरण और रक्त प्रवाह को भी बढ़ा सकता है, जो यौन ऊर्जा को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है। यह गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष रूप से अच्छा है क्योंकि यह बाद में बच्चे के जन्म में मदद कर सकता है। साथ ही यह पाचन क्रिया में भी सुधार करता है।

    कैसे करें-

    1. ताड़ासन में अपने पैरों को फैलाकर खड़े हो जाएं।
    2. स्क्वाट में आने के लिए घुटनों को मोड़ें और अपने बट को फर्श की ओर नीचे करें।
    3. अपनी ऊपरी भुजाओं को अपने घुटनों के अंदर ले जाएं और हथेलियों को एक साथ अंजलि मुद्रा (प्रार्थना की स्थिति) में लाने के लिए कोहनियों को मोड़ें।
    4. अपने हाथों को फर्श के समानांतर फोरआर्म्स के साथ अपने दिल के केंद्र में लाने की कोशिश करें, जिससे आपकी कोहनी का दबाव घुटनों को थोड़ा खोल सके।
    5. अपनी रीढ़ को सीधा रखें, अपने बट को फर्श की ओर ले जाएं, और अपने कंधों को अपने कानों से दूर रखें।
    6. पांच सांसों तक इसी अवस्था में रुकें, फिर पैरों को सीधा करके बाहर आ जाएं। आप चाहें तो सीधे फॉरवर्ड फोल्ड में आ सकते हैं।

    ध्यान रहें, योगासन करने से पहले इसके बारे में अच्छे से रिसर्च कर लें कि ये आपके लिए सही है या नहीं। अगर आपको किसी प्रकार की शारीरिक समस्या है तो किसी एक्सपर्ट से परामर्श जरूर करें।

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