गरीबी दिखाकर राशन उठाने वाले 497 सरकारी कार्मिको से 67 लाख रूपये वसूले

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सरकार से मोटी पगार लेने के बावजूद गरीबों को 2 रुपए किलो में मिलने वाले राशन को डकारकर सरकारी खजाने को लाखों रुपए की चपत लगाने वाले सरकारी कर्मचारियों से जयपुर जिले के शाहपुरा उपखण्ड में लगभग शतप्रतिशत वसूली हो गई है। प्रशासन की ओर से चिह्नित किए गए सरकारी कार्मिकों का सरकारी राशन बंद करने के साथ ही उठाए गए राशन की बाजार भाव से वसूली होने से सरकारी खजाने में भी लाखों रुपए की आय भी हुई है।

राजस्थान पत्रिका की ओर से इस संबंध में लगातार खबरें प्रकाशित कर मामले को उजागर करने के बाद उपखण्ड प्रशासन की सख्ती से शाहपुरा में गरीबों के हक का राशन उठाने वाले 497 सरकारी कर्मचारियों ने कुल 67 लाख रुपए सरकारी खजाने में जमा करा दिए हैं। हालांकि 2020 में चिह्नित किए गए सरकारी कर्मचारियों से तो वसूली शतप्रति पूरी हो चुकी है, लेकिन प्रशासन ने अभी भी गरीबों के हक का राशन ले रहे कर्मचारियों को नए सिर से फिर से चिह्नित करने का कार्य शुरू कर दिया है। चिह्नित करने के बाद उनको भी नोटिस जारी कर वसूली की जाएगी।

ब्लॉक में 497 कर्मचारियों से 67 लाख की वसूली- उपखण्ड अधिकारी शाहपुरा मनमोहन मीणा ने बताया कि ब्लॉक में गरीब बनकर 497 सरकारी कर्मचारियों ने खाद्य सुरक्षा योजना में गरीबों को 2 रुपए किलो में मिलने वाला राशन उठाया था। उक्त कर्मचारियों से कुल 67 लाख रुपए की वसूली की गई है। प्रशासन ने कार्मिकों से 27 रुपए प्रति किलो के हिसाब से राशन की वसूली की है। इससे सरकारी खजाने में आय भी हुई है। उक्त कार्मिकों का खाद्य सुरक्षा योजना की सूची से नाम भी निष्कासित कर दिया गया है। ताकि पात्र लोगों को योजना का लाभ मिल सके।

मिलीभगत का खेल या सरकारी लापरवाही- जानकारी के अनुसार खाद्य सुरक्षा योजना में नाम जोडऩे का आवेदन करने से पहले संबंधित हल्का पटवारी व ग्राम विकास अधिकारी को भी रिपोर्ट करनी होती है। इन्हीं की रिपोर्ट के आधार पर पात्र मान कर खाद्य सुरक्षा योजना में परिवारों को शामिल किया जाता है। फिर भी एकमात्र शाहपुरा ब्लॉक में ही सैंकड़ों सरकारी कर्मचारियों का खाद्य सुरक्षा योजना में शामिल होना मिलीभगत व सरकारी लापरवाही को इंगित करता है। हालांकि ऐसे लोग भी है जो योजना में शामिल हुए तब योजना के लिए पात्र थे, लेकिन बाद में या तो सरकारी नौकरी लग गई। या फिर अन्य कारणों से अपात्र हो गए। लापरवाही के चलते यह लोग योजना से अपना नाम नहीं कटवा सके और अपात्र होने के बावजूद लाभ लेते रहे।

पत्रिका ने उठाया मुद्दा तो प्रशासन ने बरती सख्ती, शतप्रतिशत हुई वसूली- राजस्थान पत्रिका ने जनवरी 2021 के अंक में गरीबों का राशन डकारने वाले 75 फीसदी सरकारी कर्मचारी जमा नहीं करा रहे राशि और 18 जुलाई 2021 के अंक में खाद्य सुरक्षा योजना-मुफ्त का राशन खाया, 56 फीसदी कर्मचारियों पर अब भी बकाया शीर्षक से समाचार प्रकाशित कर गरीबों के हक से जुड़े इस मुददे को प्रमुखता से उठाया था। इसके बाद प्रशासन ने सख्ती बरते हुए लगातार तीन से चार नोटिस थमाए। साथ ही विभागीय अधिकारियों को लिखना शुरू किया, तब जाकर शतप्रतिशत रिकवरी हुई है।

इनका कहना है— शाहपुरा ब्लॉक में पूर्व की सूची में 497 सरकारी कर्मचारियों ने खाद्य सुरक्षा योजना के तहत गेहूं उठाया था। उक्त कार्मिकों से 67 लाख की वसूली कर ली गई है। ब्लॉक में वर्तमान में पूर्व सूची के कार्मिकों से राशन की 27 रुपए किलो के हिसाब से शतप्रतिशत रिकवरी हो चुकी है। अब भी जो कर्मचारी सरकारी राशन उठा रहे हैं, उनको चिह्नित कर नोटिस जारी करने के बाद नियमानुसार वसूली की जाएगी। साथ ही राशि जमा नहीं कराने पर कार्मिकों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी होगी। ———मनमोहन मीणा, उपखंड अधिकारी, शाहपुरा

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