राजस्थान की यह सब्जी मिल रही है 1200 रुपये किलो, फायदे सुनकर आप भी दीवाने हो जाओगे

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    पानी की कमी से जूझने वाले शेखावाटी में जहां अन्य हरी सब्जियों की सदा कमी रही है। ऐसे में यहां सहज सुलभ व बारह महीने रहने वाली साग सब्जियों की परंपरा रही है। ऐसी एक स्वादिष्ट व सहज सुलभ सब्जी है कैर सांगरी। समय के साथ इसका प्रयोग व चलन अलग अलग तरह से होने लगा है। किसी जमाने में आम रहने वाली कैर सांगरी की सब्जी अब शहरों में खास हो गई है। राजस्थान से बाहर तो इस सब्जी की कीमत सूखने के बाद 400 से 1200 रुपए किलो तक हो गई है।

    क्या है केर सांगरी- केर सांगरी एक पारपरिक सब्जी है। जिसमें विभिन्न मसालों, तेल के साथ केर के फलों और सांगरी की फलियों को पकाया जाता है। केर और सांगरी के पेड़ हरियाणा और राजस्थान में ज्यादा पाए जाते हैं और आमतौर पर इनकी खेती नहीं की जाती है। जंगलों में उगने के कारण इनकी कीमत साधारण सब्जियों की तुलना में बहुत महंगी होती है।

    कोलेस्ट्रॉल करता है नियंत्रित- आयुर्वेद के रिटायर्ड उप निदेशक डॉ चंद्रकांत गौतम चिराना के अनुसार हाई कोलेस्ट्रॉल की परेशानी से ग्रस्त लोगों के लिए केर सांगरी का सेवन लाभकारी माना जाता है क्यों कि यह कोलेस्ट्रॉल लेवल को कम करता है। इसके साथ ही केर सांगरी के सेवन से डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और मोटापे जैसी लाइफस्टाइल से होने वाली बीमारियों का खतरा भी कम होता है।

    एक्सपर्ट व्यू: होते हैं पोषक तत्व- सांगरी की फलियों में कई प्रकार के पोषक तत्व पाए जाते हैं। जिनमें मैग्नीशियम, पोटेशियम, कैल्शियम, आयरन और जिंक प्रमुख हैं। इसमें किसी प्रकार के रसायन व दवा का प्रयोग नहीं किया जाता। शरीर की रोगप्रतिरोधक शक्ति बढ़ाने के लिहाज से केर सांगरी की सब्ज़ी का सेवन फायदेमंद माना जाता है। केर और सांगरी दोनों ही एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर फूड्स हैं और यह रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए एक आवश्यक और महत्वपूर्ण पोषक तत्व है। पाचन में भी फायदेमंद है।
    डॉ महेश माटोलिया, वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी आयुर्वेद

    प्रवासियों व शादी विवाह में मांग ज्यादा- शहर के छावनी के छावनी बाजार के किराना व्यापारी मुकेश टेकड़ीवाल के अनुसार सूखे कैर सांगरी की मांग प्रवासी मारवाड़ी परिवारों में ज्यादा रहती है। देश के विभिन्न स्थानों से आने वाले प्रवासी जाते समय कैर सांगरी अपने साथ ले जाना नहीं भूलते। वहीं शादी ब्याह के सीजन में स्थानीय स्तर पर भी इनकी मांग रहती है।

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