रूस और यूक्रेन के बिच वॉर से गेहूं किसानों की चांदी, पूरी दुनिया में भारतीय गेहूं की जबरदस्त मांग

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    इस साल गेहूं की पैदावार अच्छी हुई है. इससे भी बड़ी राहत की खबर ये है कि दुनिया भर में भारतीय गेहूं की मांग बढ़ी है. रूस और युक्रेन मिलकर दुनिया को 80 लाख टन गेंहू सप्लाई करते हैं. ये सप्लाई पुरी तरह से ठप है.

    इसलिए यूरोप के मार्केट पर भारतीय एक्सपोर्टरों की नज़र है और इसका फायदा किसानों को भी होने लगा है. अब सरकारी रेट से ज्यादा किसानों को मंडियों में गेंहू का रेट मिलने लगा है.

    नवी मुंबई के एपीएमसी गेंहू मार्केट में रौनक लौट आई है. इस बार गेंहू की डिमांड अच्छी है इसके दो कारण हैं एक तो दुनियां के 58 देशों में इस बार गेंहू की डिमांड है ,दूसरे जो सरकार की एमएसपी 2015 रूपए प्रति क्विंटल है. उससे ज्यादा रेट मार्केट में ही मिलने लगा है. किसानों के लिए दोहरा फायदा है एक तो रेट अच्छा मिल रहा दुसरे सरकार का पैसा देर से मिलता है. जबकि मंडियों में नकदी में कारोबार है. थोक व्यापारी लालजी भाई कहते हैं कि किसानों को सरकारी रेट से प्रति किलो एक-डेढ़ रुपए ज्यादा ही मिल रहा है.

    आंकड़ों की बात करें तो पिछले साल देश से क़रीब 50 लाख टन गेहूं का एक्सपोर्ट हुआ था. लेकिन इस बार भारतीय गेंहू की मांग दुनिया के कई देशों में बढ़ी है. मध्यप्रदेश के मालवा शक्ति पोषक जो कि पास्ता में यूज होने लगा है. उसकी यूरोपियन देशों में खूब मांग है.

    इसके अलावा इंडोनेशिया जो कि नूडल्स का सप्लायर है उसके लिए अब भारतीय गेहूं पहली पसंद बन रहे हैं. रूस और यूक्रेन से गेहूं का एक्सपोर्ट पूरी तरह से बंद हो चुका है इसलिए फिलिपिंस , इटली और ट्यूनेशिया को भी भारतीय गेहूं चाहिए. ईजिप्ट का एक बड़ा ऑर्डर भारत को अभी मिला है. इसके आलावा श्रीलंका , बांग्लादेश , कोरिया,  सहित अफ्रीकी देशों में भारतीय गेहूं की मांग पहले से बढ़ गई है मार्केट के जानकार एक्सपोर्टर देवेंद्र वोरा कहते हैं कि काफी समय बाद भारतीय गेहूं की इतनी मांग है.

    सरकार का अनुमान है कि इस साल 11 से 12 मिलियन टन गेहूं एक्सपोर्ट हो सकता है. और  चूंकि देश में 95 से 100 मिलियन टन गेंहू के पैदावार होने की उम्मीद है. इसलिए गेहूं की कोई कमी नहीं है ऊपर से अभी एफसीआई के गोदामों में यानि सरकार के पास 30 मिलियन टन गेंहू स्टॉक में ही पड़ा है.

    इसलिए एक्सपोर्ट बढ़ने का देश की लोकल मार्केट पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा. एक्सपोर्ट को बढ़ावा देने के लिए रेल मंत्रालय एक्सपोर्टरों को तुरंत रैक उपलब्ध करवा रहा है. मध्यप्रदेश सरकार ने तो एक्सपोर्टरों को मंडी टैक्स में छूट दे दी है जो कि 1.8 फीसदी लगती थी. कुल मिलाकर इस बार गेंहू किसानों के अच्छे दिन आ गए हैं.

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