रतन टाटा के साथ कौन है वो लड़का जिसने मनाया जन्मदिन, जानिए पूरी सच्चाई

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    रतन टाटा दुनिया के दिग्गज उद्योगपतियों में से एक हैं. लेकिन सबसे ज्यादा जिस बात के लिए लोग उनकी रिस्पेक्ट करते हैं, उन्हें अपना आदर्श मानते हैं, वो है उनकी सादगी. बीते मंगलवार 28 दिसंबर, 2021 को उनका जन्मदिन था. लेकिन जैसा कि हमने आपसे कहा… सादगी. रतन टाटा ने बेहद ही सादे तरीके से अपना जन्मदिन मनाया. इसका एक वीडियो भी सामने आया था. इसमें वो एक शख्स के साथ अपना बर्थडे सेलिब्रेट कर रहे थे. वो एक कुर्सी पर बैठे हुए थे और सामने टेबल पर एक छोटा कप केक काटते हुए दिख रहे थे. इसी दौरान एक लड़का रतन टाटा के पास आकर खड़ा हो जाता है और उसके कंधे पर हाथ रख देता है. वो फिर वहीं बैठ जाता है और रतन टाटा को अपने हाथ से कप केक का एक टुकड़ा खिलाता है.

    अब जैसे ही वीडियो वायरल हुआ लोग पूछने लगे कि भाई ये लड़का है कौन? तो चलिए आपको बताते हैं. वीडियो में जो लड़का टाटा के साथ दिखा उसका नाम शांतनु नायडू है. वो उनके निजी सचिव हैं. ऐसा बहुत कम देखने को मिलता है कि 85 वर्षीय कोई बिजनेसमैन किसी युवा को अपना निजी सचिव नियुक्त करे. लेकिन रतन टाटा ने ऐसा किया और 28 वर्षीय शांतनु को मौका दिया.

    बीबीसी के मुताबिक, शांतनु अपने परिवार की पांचवी पीढ़ी हैं जो टाटा ग्रुप के साथ काम कर रही है. बता दें कि उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ पुणे से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की है. उन्होंने जूनियर डिजाइन इंजीनियर के तौर पर Tata Elxsi ज्वाइन की थी. शांतनु ने की कहानी को फेसबुक पेज ह्यूमन्स ऑफ बॉम्बे पर भी शेयर किया गया था.

    इसमें उन्होंने बताया कि 2014 में उनकी लाइफ बदल गई. उन्होंने एक कुत्ते को सड़क पर एक्सीडेंट में मरते हुए देखा. वो काफी परेशान हुए थे और उन्होंने डॉग्स को बचाने के लिए काम करना शुरू किया.

    शांतनु ने सड़क हादसों में मारे जाने वाले कुत्तों को बचाने के बारे में सोचना शुरू किया. उन्होंने उनके गले पर कॉलर बनाने का आइडिया आया. एक ऐसा कॉलर जो चमकदार हो ताकि वाहन चालक उसे दूर से ही देख लें और बेजुबान की जान बच जाए. वो हादसों का शिकार ना हों. इसके लिए उन्होंने Motopaws नाम का एक संगठन बनाया. सबसे पहले उन्होंने 500 कॉलर बनाए और बेजुबानों को पहनाए. यह काम इतना आसान नहीं था, इसके लिए पैसे और लोगों की जरूरत भी थी. लेकिन शांतनु सब मैनेज कर रहे थे.

    जो लोग रतन टाटा के बारे में थोड़ा बहुत जानते हैं, वो यह बात जरूर जानते होंगे कि उन्हें डॉग्स से बड़ा प्यार है. टाटा कंपनी के न्यूजलेटर में शांतनु का जिक्र किया गया. जिसको रतन टाटा ने भी सराहा. इसी के कारण दोनों की मुलाकात हुई. शांतनु ने उन्हें अपनी टीम के बाकी लोगों से मिलवाया जो बेजुबानों की रक्षा करने और उनका ध्यान रखने का काम कर रहे थे. रतन टाटा ने सबकी हौसलाअफजाई की.

    इसके बाद शांतनु आगे की पढ़ाई करने के लिए अमेरिका चले गए. लेकिन रतन टाटा और उनकी ई-मेल पर बात होती रहती थी. यहां तक कि उनकी दोस्ती इतनी ज्यादा बढ़ गई कि शांतनु की ग्रेजुएशन सेरेमनी में टाटा ने खुद हिस्सा लिया था. वहां से लौटने के बाद उन्हें टाटा के साथ काम करने का मौका मिला. यह शांतनु की मेहनत ही है जो रतन टाटा सोशल मीडिया पर आए और छा गए.

    शांतनु ने अपने और रतन टाटा की दोस्ती, किस्सों को लेकर एक किताब भी लिखी है. इसका किताब का टाइटल ‘I Came upon a lighthouse’ है. वो बताते हैं कि इस किताब को लिखने का सजेशन उनकी मां ने दिया था. शांतनु यहां तक कि रतन टाटा को नए बिजनेस आइडियाज भी देते हैं.

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